
सोयाबीन की फसल में तम्बाखू इल्ली का नियंत्रण कैसे करें
सोयाबीन की फसल में तम्बाखू इल्ली एक खतरनाक कीट है जो पत्तियों को खाकर फसल को भारी नुकसान पहुंचाती है। जानिए इसका नियंत्रण कैसे करें।
सोयाबीन भारत की एक प्रमुख तिलहनी फसल है। लेकिन इसमें कई प्रकार के कीट लगते हैं जिनमें तम्बाखू इल्ली (Tobacco Caterpillar) एक खतरनाक कीट है। यह कीट पत्तियों को खाकर फसल की वृद्धि और उत्पादन को प्रभावित करता है।
तम्बाखू इल्ली से होने वाली क्षति
- छोटी अवस्था की इल्लियाँ पत्तियों के हरे भाग को खाती हैं।
- बड़ी होने पर पूरी पत्तियाँ खा जाती हैं और बड़े छेद बना देती हैं।
- खाई हुई पत्तियाँ सफेद पीले जाल की तरह दिखाई देती हैं।
- अधिक प्रकोप होने पर फसल की पैदावार में भारी गिरावट आती है।
तम्बाखू इल्ली की रोकथाम के उपाय (IPM)
- क्षतिग्रस्त पौधों को उखाड़कर नष्ट करें।
- गर्मी के मौसम में गहरी जुताई करें।
- उचित बीज दर का उपयोग करें।
- अत्यधिक नाइट्रोजन उर्वरकों का प्रयोग न करें।
- खरपतवार नियंत्रण करें।
- प्राकृतिक शत्रुओं जैसे मकड़ी, छिपकली, चिड़िया आदि को संरक्षण दें।
- प्रकाश और फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करें।
जैविक नियंत्रण
तम्बाखू इल्ली के नियंत्रण के लिए एन.पी. वायरस 250 एल.ई. को 500 मि.ली पानी के साथ मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।
रासायनिक नियंत्रण
जब कीट की संख्या आर्थिक नुकसान स्तर से अधिक हो जाए तब कीटनाशक का उपयोग करें:
- क्लोरेन्ट्रानिलिप्रोल 18.5% SC – 60 मि.ली प्रति एकड़
- फ्लुबेंडामाइड 20% SC – 100 मि.ली प्रति एकड़
- क्विनालफॉस 25 EC – 1000 मि.ली प्रति हेक्टेयर
निष्कर्ष
यदि किसान समय रहते तम्बाखू इल्ली का नियंत्रण करते हैं तो सोयाबीन की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
सामान्य प्रश्न
सोयाबीन में तम्बाखू इल्ली की पहचान कैसे करें?
यह कीट पत्तियों को खाकर बड़े छेद बनाता है और पत्तियाँ जाल जैसी दिखती हैं।



























