भारत में गाय को सिर्फ पशु नहीं, बल्कि “मां” के रूप में पूजनीय स्थान प्राप्त है। खेती-किसानी, ग्रामीण जीवन और जैविक खेती में गाय का महत्व हमेशा से रहा है। गायों के संरक्षण और देखभाल के लिए सरकारें समय-समय पर विशेष योजनाएँ चलाती रही हैं। हाल ही में विभिन्न राज्यों की सरकारों ने गौशाला स्थापित करने पर 10 लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है। यह कदम न केवल गायों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि किसानों और पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय का अवसर भी है।
मध्य प्रदेश सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत गौशाला स्थापित करने पर 10 लाख रुपए प्रोत्साहन अनुदान देने की घोषणा की है। यदि कोई किसान, संस्था या समूह 25 गायों की क्षमता वाली गौशाला या लगभग 42 लाख रुपये लागत वाली यूनिट स्थापित करता है तो उसे यह सहायता दी जाएगी। इसके अलावा बड़ी इकाइयों पर सरकार कुल निवेश लागत का 25% अनुदान भी देगी। साथ ही सरकार दूध को उचित मूल्य पर खरीदने की गारंटी भी दे रही है।
(स्रोत: किसान समाधान – kisansamadhan.com)
राजस्थान सरकार ने गौशालाओं को प्रोत्साहित करने के लिए गौशाला विकास योजना शुरू की है। इसके तहत पंजीकृत गौशालाओं को अधिकतम 10 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। यह राशि गौशाला शेड, चारदीवारी, पानी की टंकी, चारा भंडारण और अन्य संरचनाओं पर खर्च की जा सकती है।
इसमें 90% राशि सरकार देती है और 10% योगदान लाभार्थी को करना होता है।
योजना का लाभ उन्हीं पंजीकृत गौशालाओं को मिलेगा जिनमें कम से कम 100 गायों का दो वर्षों से संरक्षण हो रहा हो।
(स्रोत: राज सूचना पोर्टल – rajsuchna.com, जनभारती पोर्टल)
हरियाणा सरकार ने हाल ही में 200 गौशालाओं को 10 लाख रुपए प्रति गौशाला शेड निर्माण हेतु देने की घोषणा की। साथ ही बायोगैस, सौर ऊर्जा और चारा मशीन जैसी सुविधाएँ भी मुहैया कराई जा रही हैं।
(स्रोत: Times of India)
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रत्येक प्रभाग में आदर्श गौशालाओं की स्थापना का निर्णय लिया है। इन गौशालाओं को स्व-वित्तीय बनाया जाएगा और इनके माध्यम से प्राकृतिक खेती, जैविक खाद और रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जाएगा।
(स्रोत: Times of India)
गौशाला केवल आवारा गायों का आश्रय नहीं है, बल्कि यह किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर सकती है।
जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर आय अर्जित की जा सकती है।
गोबर गैस प्लांट से घरेलू ऊर्जा और अतिरिक्त कमाई संभव है।
गोमूत्र आधारित उत्पाद जैसे जैविक कीटनाशक और दवाइयाँ बनाई जा सकती हैं।
दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री से भी लाभ बढ़ेगा।
गौशाला स्थापना पर प्रोत्साहन राशि न केवल गौ संरक्षण को बढ़ावा देती है बल्कि ग्रामीण विकास, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती है। किसानों, पशुपालकों और स्वयंसेवी संस्थाओं को चाहिए कि वे इन योजनाओं का लाभ उठाएँ और गौशालाओं को आत्मनिर्भर इकाइयों में बदलें।
यदि आप भी गौशाला स्थापित करना चाहते हैं, तो अपने जिले के पशुपालन विभाग से संपर्क करें और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।