ऑर्गेनिक फार्मिंग: भारत की कृषि क्रांति की नई दिशा

Jan. 5, 2026

नमस्कार, खेतीवाड़ी डॉट कॉम के पाठकों! आज हम बात करेंगे ऑर्गेनिक फार्मिंग की, जो न केवल हमारी मिट्टी को स्वस्थ रखती है बल्कि हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण को भी मजबूत बनाती है। रासायनिक खेती के दौर में जहां फसलें तेजी से उगती हैं लेकिन मिट्टी की उर्वरता घटती जा रही है, ऑर्गेनिक फार्मिंग एक सतत विकल्प के रूप में उभर रही है। यह ब्लॉग आपको ऑर्गेनिक फार्मिंग के बारे में विस्तार से बताएगा, जिसमें इसके फायदे, भारत में स्थिति, विधियां और चुनौतियां शामिल हैं।

ऑर्गेनिक फार्मिंग क्या है?

ऑर्गेनिक फार्मिंग वह कृषि पद्धति है जिसमें रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और जीएमओ (जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म्स) का उपयोग नहीं किया जाता। इसके बजाय, प्राकृतिक तरीकों जैसे कंपोस्ट, जैविक खाद, फसल चक्रण और प्राकृतिक कीट नियंत्रण पर जोर दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मिट्टी की जैविक विविधता को बनाए रखना और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन करना है। विश्व स्तर पर, ऑर्गेनिक फार्मिंग तेजी से लोकप्रिय हो रही है क्योंकि उपभोक्ता अब स्वस्थ और प्राकृतिक भोजन की मांग कर रहे हैं।

ऑर्गेनिक फार्मिंग के फायदे

ऑर्गेनिक फार्मिंग के कई लाभ हैं जो किसानों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण को प्रभावित करते हैं:

  • स्वास्थ्य लाभ: ऑर्गेनिक उत्पादों में रासायनिक अवशेष नहीं होते, जिससे कैंसर, एलर्जी और अन्य बीमारियों का खतरा कम होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि ऑर्गेनिक भोजन में अधिक एंटीऑक्सीडेंट्स और पोषक तत्व होते हैं।
  • पर्यावरण संरक्षण: यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, जल प्रदूषण कम करती है और जैव विविधता को बढ़ावा देती है। जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि कार्बन को मिट्टी में संग्रहित करती है।
  • आर्थिक लाभ: हालांकि शुरुआती लागत अधिक हो सकती है, लेकिन लंबे समय में किसानों को प्रीमियम मूल्य मिलता है। भारत में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिससे निर्यात के अवसर बढ़े हैं।

भारत में ऑर्गेनिक फार्मिंग की स्थिति

भारत दुनिया में सबसे अधिक ऑर्गेनिक किसानों वाला देश है, जहां 27 लाख से अधिक किसान इस पद्धति से जुड़े हैं। 2025 तक, ऑर्गेनिक फार्मिंग बाजार INR 51,560 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। सिक्किम जैसे राज्य पूरी तरह ऑर्गेनिक हो चुके हैं, जबकि मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर यह अपनाई जा रही है। सरकार की योजनाएं जैसे परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) और मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन (MOVCDNER) किसानों को समर्थन दे रही हैं। 2025 में ट्रेंड्स में घरेलू खपत में वृद्धि, बेहतर प्रमाणीकरण और निर्यात उन्मुखीकरण शामिल हैं। ऑर्गेनिक फूड मार्केट 2033 तक US$ 21.99 बिलियन तक पहुंच सकता है।

ऑर्गेनिक फार्मिंग की विधियां

ऑर्गेनिक फार्मिंग अपनाने के लिए कुछ बुनियादी विधियां हैं:

  1. कंपोस्टिंग: फसल अवशेषों और गोबर से जैविक खाद बनाना।
  2. फसल चक्रण: विभिन्न फसलों को बारी-बारी से उगाना ताकि मिट्टी की पोषकता बनी रहे।
  3. प्राकृतिक कीट नियंत्रण: नीम, लहसुन जैसे प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग।
  4. जैविक बीज: प्रमाणित ऑर्गेनिक बीजों का चयन।
  5. जल संरक्षण: ड्रिप इरिगेशन और वर्षा जल संग्रहण।

ये विधियां न केवल लागत प्रभावी हैं बल्कि लंबे समय में उत्पादकता बढ़ाती हैं।

 

चुनौतियां और समाधान

ऑर्गेनिक फार्मिंग की राह आसान नहीं है। मुख्य चुनौतियां हैं: शुरुआती कम उपज, प्रमाणीकरण की जटिलता, बाजार पहुंच और उच्च लागत। हालांकि, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, किसान समूह और सरकारी सब्सिडी इनका समाधान कर रहे हैं। 2025 में, टेक्नोलॉजी जैसे ड्रोन और एआई ऑर्गेनिक फार्मिंग को और कुशल बना रहे हैं।

निष्कर्ष

ऑर्गेनिक फार्मिंग न केवल एक कृषि पद्धति है बल्कि एक जीवन शैली है जो सतत विकास को बढ़ावा देती है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में यह क्रांति ला सकती है। यदि आप किसान हैं, तो आज से ही छोटे स्तर पर शुरू करें। अधिक जानकारी के लिए खेतीवाड़ी डॉट कॉम पर अन्य लेख पढ़ें या हमसे संपर्क करें। स्वस्थ खेती, स्वस्थ भारत!

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