
एमपी में कमजोर रह सकता है मानसून, अल-नीनो का असर बढ़ाएगा किसानों की चिंता
मध्य प्रदेश में इस साल सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। अल-नीनो प्रभाव के कारण मानसून कमजोर रह सकता है।
एमपी में कमजोर रह सकता है मानसून, अल-नीनो का असर बढ़ाएगा किसानों की चिंता
20 जून के after मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री के संकेत
मध्य प्रदेश के किसानों के लिए इस साल मानसून को लेकर चिंता बढ़ सकती है। मौसम विभाग के शुरुआती अनुमान के अनुसार प्रदेश के अधिकांश जिलों में इस बार सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अल-नीनो प्रभाव के कारण मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे खेती, पेयजल और सिंचाई पर असर देखने को मिल सकता है।
प्रदेश में जहां सामान्य तौर पर लगभग 37 इंच तक बारिश दर्ज होती है, वहीं इस बार केवल 30 से 32 इंच तक वर्षा होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
इतना ही नहीं, मानसून की एंट्री भी इस बार देरी से हो सकती है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक मध्य प्रदेश में मानसून 20 जून के बाद दस्तक दे सकता है।
किन जिलों में अच्छी बारिश की उम्मीद?
पूर्वानुमान के अनुसार कुछ जिलों में सामान्य या सामान्य से बेहतर बारिश हो सकती है। इनमें मुख्य रूप से:
ग्वालियर
भिंड
नीमच
उज्जैन
बड़वानी
आलीराजपुर
दमोह
अनूपपुर
जैसे जिले शामिल बताए जा रहे हैं।
वहीं सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, मंडला, खरगोन, बुरहानपुर और नरसिंहपुर सहित कई जिलों में औसत से कम बारिश रहने की संभावना जताई गई है।
जून में कमजोर रहेगा मानसून
मौसम विभाग के अनुसार जून महीने में बारिश की गतिविधियां कमजोर रह सकती हैं। हालांकि जुलाई में मानसून कुछ रफ्तार पकड़ सकता है, लेकिन पूरे सीजन में बारिश का वितरण असमान रहने की संभावना है।
इसका सीधा असर सोयाबीन, मक्का, उड़द और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है।
अल-नीनो क्या है और इसका असर क्यों पड़ता है?
अल-नीनो एक मौसमीय स्थिति है जिसमें समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इससे हवा के बहाव और बारिश के पैटर्न में बदलाव आता है।
जब अल-नीनो सक्रिय होता है तो भारत की ओर आने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे बारिश कम हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जून, जुलाई और अगस्त के दौरान इसका असर देखने को मिल सकता है।
कम बारिश से बढ़ सकती है किसानों की परेशानी
पिछले दो वर्षों में अच्छी बारिश के कारण प्रदेश में फसलों का उत्पादन बेहतर रहा था। सोयाबीन, गेहूं और चने जैसी फसलों में किसानों को अच्छा फायदा मिला।
लेकिन इस साल यदि बारिश कमजोर रहती है तो:
खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है
सिंचाई संकट बढ़ सकता है
जलाशयों में पानी कम भर सकता है
पेयजल संकट गहरा सकता है
उत्पादन घटने से बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है
विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
किसानों के लिए क्या है सलाह?
विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि:
मौसम अपडेट पर लगातार नजर रखें
कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दें
ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सिंचाई तकनीक अपनाएं
बुवाई जल्दबाजी में न करें
बीज और खाद का संतुलित उपयोग करें
निष्कर्ष
इस साल मध्य प्रदेश में मानसून सामान्य से कमजोर रहने की संभावना किसानों के लिए चुनौती बन सकती है। अल-नीनो प्रभाव के चलते बारिश में कमी आने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में किसानों को मौसम के अनुसार रणनीति बनाकर खेती करने की जरूरत होगी।
Khetiwadi किसानों तक हर जरूरी मौसम अपडेट, मंडी भाव और खेती की जानकारी लगातार पहुंचाता रहेगा।
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