
जापान ने रोकी भारत के आमों की खरीद, जानिए क्या है वजह और कैसे पड़ेगा असर
जापान द्वारा भारतीय आमों की खरीद पर रोक लगाने की खबर ने कृषि निर्यात क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। एक्सपोर्ट नियमों और गुणवत्ता मानकों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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जापान द्वारा भारतीय आमों की खरीद पर रोक लगाने की खबर ने कृषि निर्यात क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। एक्सपोर्ट नियमों और गुणवत्ता मानकों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जापान द्वारा भारतीय आमों की खरीद पर रोक लगाने की खबर ने कृषि निर्यात क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। एक्सपोर्ट नियमों और गुणवत्ता मानकों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भारत के प्रीमियम आमों पर जापान की रोक ने किसानों और निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है।
भारत के आम दुनियाभर में अपनी मिठास और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं। लेकिन हाल ही में जापान द्वारा भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाने की खबर ने कृषि निर्यात क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि जापान को होने वाला आम निर्यात बहुत बड़ा नहीं माना जाता, लेकिन यह घटना भारतीय कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों को लेकर कई सवाल खड़े करती है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भारतीय आमों का जिक्र किया। इसके बाद आमों की विभिन्न किस्मों और भारत की मैंगो डिप्लोमेसी को लेकर चर्चा तेज हो गई।
भारत में अल्फांसो, केसर, दशहरी, लंगड़ा, मालदा, जरदालू, तोतापुरी और नीलम जैसे आम दुनियाभर में लोकप्रिय हैं।
भारत वर्षों से आमों के जरिए सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध मजबूत करता आया है। इसे मैंगो डिप्लोमेसी कहा जाता है।
1955 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इंडोनेशिया सम्मेलन में भारतीय आम भेजे थे। हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने भी विदेश यात्राओं के दौरान भारतीय आम उपहार स्वरूप दिए हैं।
भारत यूएई, अमेरिका और ब्रिटेन को बड़ी मात्रा में आम निर्यात करता है
भारतीय आम वैश्विक बाजार में प्रीमियम उत्पाद माने जाते हैं
मैंगो डिप्लोमेसी भारत की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है
भारत हर साल लगभग 25 मिलियन टन आम का उत्पादन करता है। इसमें उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश का सबसे बड़ा योगदान है।
हालांकि इतने बड़े उत्पादन के बावजूद भारत केवल लगभग 32 हजार मीट्रिक टन आम ही निर्यात कर पाता है।
राज्य | योगदान |
|---|---|
उत्तर प्रदेश | लगभग 26% |
आंध्र प्रदेश | लगभग 21% |
रिपोर्ट्स के अनुसार जापान ने भारतीय आमों की वेपर हीट ट्रीटमेंट और फ्यूमिगेशन प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए हैं। निरीक्षण के दौरान जापानी अधिकारियों को कुछ केंद्रों पर फ्रूट फ्लाई और गुणवत्ता संबंधी समस्याएं मिलीं।
जापान खाद्य सुरक्षा और कीट नियंत्रण नियमों को लेकर बेहद सख्त माना जाता है। ऐसे में प्रक्रियाओं में कमी के चलते भारतीय आमों की खरीद रोक दी गई।
फ्रूट फ्लाई की समस्या
कमजोर फ्यूमिगेशन प्रक्रिया
डॉक्यूमेंटेशन में कमी
निर्यात मानकों का पालन न होना
भारत पहले से ही कई वैश्विक व्यापार चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में कृषि निर्यात में रुकावट विदेशी मुद्रा आय पर भी असर डाल सकती है।
यदि भारत गुणवत्ता मानकों को सुधारने में सफल नहीं होता, तो अन्य देश जैसे बांग्लादेश और पाकिस्तान बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत को निम्न सुधारों पर ध्यान देना होगा:
वेपर हीट ट्रीटमेंट प्रक्रिया मजबूत करनी होगी
कीट नियंत्रण मानकों का सख्ती से पालन करना होगा
निर्यात केंद्रों पर स्वच्छता बढ़ानी होगी
डॉक्यूमेंटेशन और निरीक्षण प्रक्रियाएं सुधारनी होंगी
फ्रूट फ्लाई नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना होगा
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में कई जगह कार्बाइड से पकाए गए आम बेचे जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।
आम खरीदते समय उसकी खुशबू, रंग और नरमी पर ध्यान दें। खाने से पहले आम को अच्छी तरह धोना और कुछ देर पानी में रखना बेहतर माना जाता है।
नेचुरली पके आम की खुशबू और स्वाद अलग होता है, जबकि कार्बाइड से पके आम बाहर से पीले लेकिन अंदर से कच्चे हो सकते हैं।
भारत के आम केवल एक फल नहीं बल्कि देश की पहचान और कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जापान द्वारा आयात रोकना भारत के लिए चेतावनी की तरह है कि गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
यदि निर्यात प्रक्रियाओं में सुधार किया जाए तो भारतीय आम दुनियाभर में और बड़ी पहचान बना सकते हैं।
जापान ने भारतीय आमों के आयात पर गुणवत्ता, फ्रूट फ्लाई और निर्यात मानकों से जुड़ी चिंताओं के कारण रोक लगाई है।
भारत हर साल लगभग 25 मिलियन टन आम का उत्पादन करता है और दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश माना जाता है।
जब भारत आमों के जरिए दूसरे देशों के साथ सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध मजबूत करता है, उसे मैंगो डिप्लोमेसी कहा जाता है।
गुणवत्ता नियंत्रण, कीट प्रबंधन, फ्यूमिगेशन और अंतरराष्ट्रीय निर्यात मानकों का पालन भारतीय आम निर्यात की बड़ी चुनौतियां हैं।
कार्बाइड से पके आम बाहर से ज्यादा पीले दिखाई देते हैं लेकिन अंदर से कच्चे हो सकते हैं। इनमें प्राकृतिक खुशबू भी कम होती है।
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