
लहसुन की फसल में खाद और उर्वरक प्रबंधन की पूरी जानकारी
लहसुन की फसल में अधिक उत्पादन के लिए संतुलित मात्रा में गोबर की खाद, उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग आवश्यक होता है।
लहसुन की फसल में उर्वरक प्रबंधन का महत्व
लहसुन की फसल में उर्वरकों और खाद की मात्रा मिट्टी की उर्वरक क्षमता पर निर्भर करती है। उचित पोषण मिलने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है।
जैविक खाद का उपयोग
सामान्यतः प्रति हेक्टेयर 20 से 25 टन पकी हुई गोबर की खाद या 5 से 8 टन वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करना चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वरता और संरचना बेहतर होती है।
मुख्य उर्वरक आवश्यकता
- नत्रजन (Nitrogen) – 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- फास्फोरस (Phosphorus) – 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- पोटाश (Potash) – 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
इन पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए लगभग 175 किलोग्राम यूरिया, 109 किलोग्राम डीएपी और 83 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश की आवश्यकता होती है।
उर्वरक देने की विधि
- गोबर की खाद, डीएपी और पोटाश की पूरी मात्रा खेत की अंतिम जुताई के समय मिट्टी में मिलाएं।
- यूरिया की आधी मात्रा खेत की तैयारी के समय दें।
- शेष यूरिया की मात्रा 30–40 दिन बाद खड़ी फसल में दें।
सूक्ष्म पोषक तत्व
फसल की बेहतर वृद्धि के लिए 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर लगभग 3 वर्ष में एक बार उपयोग करना चाहिए।
ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन
ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन के माध्यम से जल घुलनशील उर्वरकों का उपयोग करने से लहसुन की पैदावार में वृद्धि होती है।
सामान्य प्रश्न
लहसुन की फसल में कौन से उर्वरक उपयोग किए जाते हैं?
लहसुन की फसल में यूरिया, डीएपी और पोटाश का संतुलित उपयोग किया जाता है।
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