चने की दो नई किस्मों से किसानों को होगा बड़ा फायदा
ICAR ने चने की दो नई किस्मों 'कोटा देसी चना 2' और 'कोटा देसी चना 3' को स्वीकृति दी है जो अधिक उपज और बेहतर रोग प्रतिरोध क्षमता प्रदान करती हैं।
चने की नई किस्मों को ICAR की मंजूरी
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने चने की दो नई उन्नत किस्मों को स्वीकृति दी है। इन किस्मों को कोटा देसी चना 2 और कोटा देसी चना 3 नाम दिया गया है। इन किस्मों का विकास राजस्थान के कृषि अनुसंधान स्टेशन, उम्मेदगंज (कोटा) द्वारा लगभग एक दशक के शोध के बाद किया गया है।
नई किस्मों की विशेषताएँ
इन किस्मों को पहले RKGM 20-1 और RKGM 20-2 के नाम से जाना जाता था। परीक्षणों में इनकी उपज पारंपरिक किस्मों की तुलना में 5% से अधिक पाई गई है।
- फसल अवधि: लगभग 126 से 132 दिन
- उच्च रोग प्रतिरोध क्षमता
- अधिक उपज क्षमता
- सिंचित और अच्छी वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
कोटा देसी चना 2 की विशेषताएँ
इस किस्म की औसत उपज लगभग 20.72 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो कि प्रचलित किस्म पूसा चना 4005 की औसत उपज (16-17 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) से अधिक है।
- मध्यम ऊँचाई के पौधे
- अर्ध-खड़ी संरचना
- लगभग 18.77% प्रोटीन
कोटा देसी चना 3 की विशेषताएँ
यह किस्म भी किसानों के लिए लाभदायक मानी जा रही है जिसकी औसत उपज 15.57 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है।
- मशीन से कटाई के लिए उपयुक्त
- लगभग 20.25% प्रोटीन
किसानों को कैसे होगा लाभ
ICAR की मंजूरी के बाद इन किस्मों के बीज उत्पादन और वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध होंगे और चने की खेती में उत्पादन बढ़ने की संभावना है।
निष्कर्ष
नई विकसित चना किस्में किसानों की आय बढ़ाने और चने की उत्पादकता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
सामान्य प्रश्न
चने की नई किस्में कौन-सी हैं?
कोटा देसी चना 2 और कोटा देसी चना 3 ICAR द्वारा स्वीकृत नई चना किस्में हैं।




























