लहसुन और प्याज की फसल में बीज और भूमि उपचार कैसे करें
लहसुन और प्याज की फसल को बीज एवं मिट्टी जनित रोगों से बचाने के लिए बीज और भूमि उपचार करना अत्यंत आवश्यक होता है।
लहसुन और प्याज में बीज एवं भूमि उपचार का महत्व
लहसुन और प्याज की फसल को कई प्रकार के बीज एवं मिट्टी जनित रोग प्रभावित करते हैं। इन रोगों से बचाव के लिए बुवाई से पहले बीज और भूमि का उपचार करना बहुत आवश्यक होता है। इससे पौधों की प्रारंभिक वृद्धि अच्छी होती है और रोगों का प्रकोप कम होता है।
भूमि उपचार
भूमि उपचार के लिए ट्राइकोडर्मा विरिडी @ 2.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर को 60–70 किलोग्राम गोबर की खाद में मिलाकर 8–10 दिन तक हल्की नमी में छाया में रखें। इसके बाद बुवाई से पहले अंतिम जुताई के समय इसे मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें।
इसके साथ ही खेत में 200 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर नीम खली का प्रयोग करना चाहिए जिससे मिट्टी जनित रोगों का नियंत्रण होता है।
बीज उपचार
बुवाई से पहले लहसुन या प्याज के बीज या कलियों को ट्राइकोडर्मा @ 5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित करना चाहिए। इसके बाद ही बुवाई करनी चाहिए।
लाभ
- मिट्टी जनित रोगों का नियंत्रण
- बीज जनित रोगों से सुरक्षा
- पौधों की बेहतर वृद्धि
- फसल उत्पादन में वृद्धि
सामान्य प्रश्न
लहसुन और प्याज में बीज उपचार क्यों जरूरी है?
बीज उपचार करने से बीज जनित और मिट्टी जनित रोगों से फसल की सुरक्षा होती है।




























