
प्याज के कंदों के विकास के लिए महत्वपूर्ण कृषि सलाह
प्याज की फसल में कंदों के अच्छे विकास के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन और सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग आवश्यक है।
प्याज के कंद विकास का महत्व
प्याज की फसल में कंदों का सही विकास उत्पादन और गुणवत्ता दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए खेत में उर्वरकों और खाद का संतुलित प्रबंधन करना आवश्यक है।
जैविक खाद का उपयोग
प्याज की खेती में लगभग 20–25 टन प्रति हेक्टेयर की दर से सड़ी हुई गोबर की खाद रोपाई से 1–2 महीने पहले खेत में डालनी चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों की वृद्धि बेहतर होती है।
मुख्य उर्वरक आवश्यकता
- नत्रजन – 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- फास्फोरस – 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- पोटाश – 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
इन उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने से प्याज के कंदों का विकास बेहतर होता है और उत्पादन में वृद्धि मिलती है।
सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग
प्याज की फसल में गुणवत्ता सुधार के लिए सल्फर @ 25 किलोग्राम और जिंक @ 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर देना लाभकारी होता है।
कंद विकास के लिए स्प्रे
जब प्याज की फसल कंद बनने की अवस्था में हो तब NPK 0:52:34 @ 75 ग्राम और चिलेटेड सूक्ष्म पोषक तत्व @ 15 ग्राम प्रति पंप के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। इससे कंदों का विकास तेज होता है।
सामान्य प्रश्न
प्याज के कंदों के विकास के लिए कौन से उर्वरक उपयोगी हैं?
नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर और जिंक का संतुलित उपयोग कंदों के विकास के लिए आवश्यक है।
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