सोयाबीन में गर्डल बीटल (चक्र भृंग) कीट का नुकसान और नियंत्रण
सोयाबीन की फसल में गर्डल बीटल या चक्र भृंग कीट पौधों के तनों को काटकर भारी नुकसान पहुंचाता है। समय पर प्रबंधन से फसल को बचाया जा सकता है।
सोयाबीन में गर्डल बीटल कीट का प्रकोप
सोयाबीन की फसल में चक्र भृंग या गर्डल बीटल एक प्रमुख कीट है जो पौधों के तनों और शाखाओं को काटकर नुकसान पहुंचाता है। यह कीट फसल की उपज को काफी कम कर सकता है।
कीट से होने वाले नुकसान
- मादा कीट पौधे के तने या शाखा पर दो चक्र बनाती है।
- निचले चक्र के पास छेद बनाकर पौधे के अंदर हल्के पीले रंग का अंडा देती है।
- कुछ दिनों बाद अंडे से इल्ली निकलकर पौधे के अंदर के भाग को खाकर उसे खोखला कर देती है।
- इसके कारण पौधे का ऊपरी भाग मुरझाकर सूख जाता है।
- अधिक प्रकोप होने पर पौधे का हिस्सा टूटकर गिर जाता है जिससे फलियों की संख्या कम हो जाती है।
कीट का जीवन चक्र
जून और जुलाई में दिए गए अंडों से निकली इल्ली उसी खरीफ मौसम में विकसित होकर जीवन चक्र पूरा कर लेती है। जबकि सितंबर और अक्टूबर में निकलने वाली इल्ली तने के अंदर सुषुप्त अवस्था में रहती है और अगले वर्ष बारिश के बाद सक्रिय होती है।
अनुमान के अनुसार यदि यह कीट 1% पौधों को नुकसान पहुंचाता है तो लगभग 5.5 किलोग्राम प्रति एकड़ सोयाबीन उत्पादन कम हो सकता है।
प्रबंधन और नियंत्रण
- बुआई के समय पौधों के बीच उचित दूरी रखें।
- संक्रमित पौधों या शाखाओं को चक्र के नीचे से काटकर हटा दें।
- कीट प्रकोप बढ़ने पर निम्न कीटनाशकों का छिड़काव करें:
- थायमेथोक्साम 12.6% + लैम्ब्डा सायहॅलोथरीन 9.5% ZC @ 80 मिली प्रति एकड़
- क्लोरंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC @ 60 मिली प्रति एकड़
- प्रोफेनोफोस 50% EC @ 200 मिली प्रति एकड़
सामान्य प्रश्न
सोयाबीन में गर्डल बीटल कीट क्या नुकसान करता है?
यह कीट पौधों के तनों को काटकर उन्हें खोखला कर देता है जिससे पौधे सूख जाते हैं और फलियों की संख्या कम हो जाती है।




























