प्याज की फसल में सल्फर का महत्व और उपयोग
प्याज की फसल में सल्फर पौधों की वृद्धि, प्रोटीन निर्माण और पत्तियों के हरेपन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पोषक तत्व है।
प्याज की फसल में सल्फर का महत्व
सल्फर पौधों के लिए एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। यह पौधों में विटामिन, एंजाइम और प्रोटीन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्याज, लहसुन और सरसों जैसी फसलों में प्राकृतिक गंध का कारण भी सल्फर ही होता है।
सल्फर की कमी के लक्षण
- नई पत्तियों का रंग पीला पड़ना
- पूरे पौधे का पीला दिखाई देना
- पत्तियों और तनों में हल्का बैंगनीपन
कई बार पत्तियों का पीलापन नाइट्रोजन की कमी से भी हो सकता है। यदि नाइट्रोजन देने के बाद भी पत्तियों का पीलापन बना रहता है तो यह सल्फर की कमी का संकेत हो सकता है।
सल्फर का पौधों में कार्य
- प्रोटीन निर्माण में सहायक
- क्लोरोफिल (पर्णहरित) के निर्माण में सहायता
- पौधों की वृद्धि को बढ़ावा
- फसल की गुणवत्ता में सुधार
सल्फर का उपयोग कब करें
सल्फर युक्त उर्वरकों का उपयोग बुवाई से पहले अंतिम जुताई के समय करना सबसे उचित होता है। किसानों को मिट्टी परीक्षण के अनुसार सल्फर की मात्रा मिट्टी में मिलानी चाहिए।
सामान्य प्रश्न
प्याज में सल्फर की कमी के क्या लक्षण होते हैं?
नई पत्तियां पीली हो जाती हैं और पूरे पौधे का रंग हल्का पीला दिखाई देता है।




























